Tuesday, 27 March 2018

" एक अरसे बाद दिखीं वो मासूमियत ,
नज़रें आज भी मुंज़मिद सी हो गई...
समझ ना सके वो क्या फेर था ,
इश्क़ में , हाँ , हमसे भी ग़लती हो गई.... 
 

तेरी सोच -- मेरे विचार 
तेरे शब्द -- मेरी जुबांन 
तेरी ख़ुशी -- वज़ह मैं 
तेरा दिल पर धड़कन मैं.... 


हाँ , आज भी रूह काँप सी जाती हैं ,
सोचकर ये सब मेरे यार ,
होगा प्यार जिस्मों का सौदा ,
पर तेरी आँखों में आज भी बसा हूँ लेके मैं प्यार.... 



ना तुझे कभी छूकर देखा 
ना ही हुआ कभी तेरा दीदार,,
कायल हूँ आज भी तेरी वफ़ाओं का ,,
जिसे करता हूँ महसूस मैं बार बार..... 



By:
Vandana Vaid Joshi 














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"......सफ़र में चलते चलते मुलाक़ात उनसे हो गई, इश्क़ से बचते फिरते थे, अब उनसे बात भी हो गई...  सोचा ना था मिलेंगे...