Saturday, 5 May 2018




"......सफ़र में चलते चलते मुलाक़ात उनसे हो गई,

इश्क़ से बचते फिरते थे,

अब उनसे बात भी हो गई... 



सोचा ना था मिलेंगे इस क़दर हम कभी,

देखते देखते राहों में हमारे भी बरसात हो गई.... 

बेशक़ डरते बहुत थे बेवफ़ाई के आलम से , ऐ सनम,

इत्तेफ़ाक़ देखो, तेरी सूरत से ही इश्क़ की शुरआत हो गई......."



By:
Vandana Vaid Joshi 

Tuesday, 27 March 2018

" एक अरसे बाद दिखीं वो मासूमियत ,
नज़रें आज भी मुंज़मिद सी हो गई...
समझ ना सके वो क्या फेर था ,
इश्क़ में , हाँ , हमसे भी ग़लती हो गई.... 
 

तेरी सोच -- मेरे विचार 
तेरे शब्द -- मेरी जुबांन 
तेरी ख़ुशी -- वज़ह मैं 
तेरा दिल पर धड़कन मैं.... 


हाँ , आज भी रूह काँप सी जाती हैं ,
सोचकर ये सब मेरे यार ,
होगा प्यार जिस्मों का सौदा ,
पर तेरी आँखों में आज भी बसा हूँ लेके मैं प्यार.... 



ना तुझे कभी छूकर देखा 
ना ही हुआ कभी तेरा दीदार,,
कायल हूँ आज भी तेरी वफ़ाओं का ,,
जिसे करता हूँ महसूस मैं बार बार..... 



By:
Vandana Vaid Joshi 













Wednesday, 14 March 2018

" ਦਾਗ਼ ਇਸ਼ਕ ਨੂੰ ਐਸੇ ਲੱਗੇ ,,

ਕੀ ਯਕੀਨ ਵੀ ਨਾ ਕਰ ਸਕੇ...

ਹੀਰੀਏ ਨੀ ਤੇਰੀ ਕਾਹਦੀ ਜ਼ਿੰਦਗੀ ,

ਦੱਸ ਹੀਰੀਏ ਨੀ ਤੇਰੀ ਕਾਹਦੀ ਜ਼ਿੰਦਗੀ,,,

ਤੈਥੋਂ ਸੱਜਣ ਵੀ ਨਾ ਸੰਭਲ ਸਕੇ..!!!





ਅੱਜ ਯਾਰ ਨੂੰ ਰੁੱਸਿਆ ਦੇਖ ਕੇ ਤੂੰ,,

ਅੱਖਾਂ ਚੋਂ ਮੋਤੀ ਡੋਲ੍ਹੇ ਨੇ..

ਰਾਂਝੇ ਨੂੰ ਨਾ ਫ਼ਰਕ ਪਿਆ,,

ਹੀਰੇ , ਤੇਰੇ ਤਾਂ ਹਿੱਜ਼ਰ ਵੀ ਕੱਖਾਂ ਚ ਰੋਲ਼ੇ ਨੇ..!!!





ਜਿਉਂਦੀ ਨੂੰ ਨਾ ਹੀਰੇ ਕਦੇ,

ਮਿਲਿਆ ਇਸ਼ਕੇ ਦਾ ਉਹ ਸੰਸਾਰ....

ਕਹਿੰਦੀ ਮੁੱਕ ਗਈ ਤਾਂ ਰਾਂਝਾ ਮਣਾ ਲਉ,

ਪਰ ਕਬਰਾਂ ਵਿੱਚ ਵੀ ਰੋਵੇਂਗੀ ਵਾਰ-ਵਾਰ..!!! "


Vandana Vaid Joshi.

Friday, 23 February 2018

वापिस हुए आज उसी सफ़र पर 
नाज़ुकता दिल की अब भी वही थी......
 शिक़वा भी था ख़ुद से अब
निगाहें ''वो '' साथ फ़िर ढूंढ रही थी .....


अक्सर ज़िकर कर देते हैं आपका
रूबरू कभी खुद भी हो जाया कीजिए ....

कभी तकल्लुफ़ कीजिये हमारी गली में आने का
कभी तो इश्क़ आप हमसे कीजिए। .....

नाउम्मीद सी एक उम्मीद रखते हैं
शायद मंज़रर आज  कुछ ऐसा हो  जाये
हम चले जाये जब उनकी दुनिया से,
उन्हें तब हमसे इश्क़ हो जाए। ....



"......सफ़र में चलते चलते मुलाक़ात उनसे हो गई, इश्क़ से बचते फिरते थे, अब उनसे बात भी हो गई...  सोचा ना था मिलेंगे...